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Showing posts from November, 2024

बसंती मतवाली

  मेरा नाम बसंत है, और मेरी उम्र 25 साल है। मैं कानपूर में रहता हूं। मैं शादीशुदा आदमी हूं, और मेरी पत्नी का नाम सुनीता है,और उसकी उम्र 23 साल है। मैं ज्यादा पढ़ा लिखा नही था,बस किसी तरह से बीएससी पास था ,पर मैं टाइपिंग जनता था , इसलिए मैं एक प्राइवेट सेक्टर में छोटी सी जॉब करता था। मैं और सुनीता एक ही बिरादरी के थे, इसलिए सुनीता के पापा ने सुनीता कीशादी मेरे साथ करा दी थी।सुनीता मेरे से काफी ज्यादा पढ़ी लिखी थी, लेकिन वो कोई जॉब नहीं करती थी,या यु कहो की मैंने कभी उसे जॉब की परमिशन नहीं दी थी। लेकिन शादी के एक साल बाद सुनीता की किस्मत ने उसका साथ दिया, और सुनीता की बड़ी कम्पनी मैं नोकरी लग गई। सुनीता को अपनी सासु मां की हर बात पर टोकने को आदत पसंद नही थी, इसलिए उसने नोकरी लगने के कुछ महीने बाद ही अपने पैसों से एक नया घर खरीद लिया था। सुनीता की सैलरी मेरी सैलरी से बहुत ज्यादा थी। लेकिन सुनीता ज्यादातर अपनी सैलरी पार्टियों में, और मौज मस्ती में खर्च कर देती थी। और मेरे मना करने पर वो मुझसे लड़ने लगती थी, और कहती कि जब मैं खुद से पैसे कमाती हूं, तभी खर्च करती हूं, मैं तुमसे तो कोई पै...

तक़दीर भाग - १ || Takdir part 1

यह कहानी चार दोस्तों की है जो बचपन के दोस्त हैं भले वह स्कूल के बाद एक साथ नहीं पढ़ सके पर फिर भी चारों की दोस्ती पूरे रायपुर गांव को पता थी नकुल और गाला दोनों मस्तीखोर थे जो बेहद बार आते जाते लड़कियों को छेरा करते थे और दोनों मिडिल क्लास परिवार से थे और सागर उसे पढ़ाई करते-करते अपने पिताजी के होटल में मदद करनी पड़ती थी अंकित जो थोड़ा शर्मीला लड़का था पर अंकित रिच परिवार से बिलोंग करता था स्कूल के बाद अंकित बड़े कॉलेज में एडमिशन लिया और गाला और सागर दोनों ने एक ही कॉलेज में एडमिशन लिया और नकुल ने पढ़ना ही बंद कर दिया जैसे वक्त गुजरता गया घर वाले नकुल को टोकने लगे एक तो पढ़ ले नहीं तो कुछ काम धंधा कर ले पर नकुल ने उनकी एक बात नहीं सुनी नकुल को धीरे-धीरे सट्टे का शोक चढ़ा और धीरे-धीरे उसके ऊपर 3 हज का कर्जा हुआ कर्जा उतारने के लिए उसके पास कुछ नहीं था फिर उसने अपने दोस्तों से कहा कि उसकी कुछ हेल्प करें पर वह सब तो अभी पढ़ रहे थे फिर भी अंकित ने जैसे तैसे करके थोड़े पैसों का इंतजाम किया फिर उसके बाद नकुल एक ग्रिल की दुकान पर काम करने लगा और कुछ पैसे कमाने लगा दिन ऐसे ही बीतने लगे देखते-द...

लड़के को जबरदस्ती बनाया नौकरानी || Ladke ko jabardasti banaya naukrani

मेरा नाम निखिल है और आज मैं आपको बताऊंगा कि कैसे मुझे एक लड़के से एक नौकरानी बननापड़ा और फिर मेरे साथ कितना बुरा हुआ और कितना अच्छा हुआ सब कुछ बताऊंगा तो चलिएकहानी शुरू करते हैं यह बात उस समय की है जब मेरी बारवी की पढ़ाई पूरी हो चुकी थीलेकिन मुझे कोई अच्छी सी नौकरी नहीं मिल रही थी क्योंकि मेरा घर एक छोटे से गांवमें था फिर मैंने सोचा कि मैं शहर में कोई अच्छी सी नौकरी करूंगा और यही सोचकर मैंअपने घर वालों से कुछ पैसे लेकर शहर में पहुंच गया और अपने लिए कोई अच्छी सी नौकरीतलाशने लगा लेकिन शहर में बर्बी तक पढ़ाई करने वालों को भला कौन पूछता है क्योंकि शहरमें तो लोग बहुत बड़ी-बड़ी डिग्री लेकर घूमते हैं इसलिए जब मुझे कोई अच्छी सी नौकरी नहीं मिली तो मैंने इंटरनेट पर औरअखबारों में भी नौकरी ढूंढनी शुरू कर दी थी फिर मुझे अखबार में एक नौकरी की पोस्टदिखी जिसमें घर का काम करने वाली और खाना बनाने वाली की जरूरत थी वैसे तो यह जॉबमहिलाओं के लिए थी लेकिन मैंने सोचा कि मुझे भी यह नौकरी मिल सकती है क्योंकिमेरे घर में कोई बहन नहीं थी इसलिए मैं घर में खाना बनाना और औरतों वाले काम करनासीख गया था फ...