मेरा
नाम निखिल है और आज मैं आपको बताऊंगा कि कैसे मुझे एक लड़के से एक नौकरानी
बननापड़ा और फिर मेरे साथ कितना बुरा हुआ और कितना अच्छा हुआ सब कुछ
बताऊंगा तो चलिएकहानी शुरू करते हैं
यह बात उस समय की है जब मेरी
बारवी की पढ़ाई पूरी हो चुकी थीलेकिन मुझे कोई अच्छी सी नौकरी नहीं मिल रही
थी क्योंकि मेरा घर एक छोटे से गांवमें था फिर मैंने सोचा कि मैं शहर में
कोई अच्छी सी नौकरी करूंगा और यही सोचकर मैंअपने घर वालों से कुछ पैसे लेकर
शहर में पहुंच गया और अपने लिए कोई अच्छी सी नौकरीतलाशने लगा लेकिन शहर
में बर्बी तक पढ़ाई करने वालों को भला कौन पूछता है क्योंकि शहरमें तो लोग
बहुत बड़ी-बड़ी डिग्री लेकर घूमते हैं
इसलिए जब मुझे कोई अच्छी सी
नौकरी नहीं मिली तो मैंने इंटरनेट पर औरअखबारों में भी नौकरी ढूंढनी शुरू
कर दी थी फिर मुझे अखबार में एक नौकरी की पोस्टदिखी जिसमें घर का काम करने
वाली और खाना बनाने वाली की जरूरत थी वैसे तो यह जॉबमहिलाओं के लिए थी
लेकिन मैंने सोचा कि मुझे भी यह नौकरी मिल सकती है क्योंकिमेरे घर में कोई
बहन नहीं थी इसलिए मैं घर में खाना बनाना और औरतों वाले काम करनासीख गया था
फिर मैंने उस पोस्ट पर लिखे हुए नंबर पर बात की तो उधर से एक औरत बोल रही
थीफिर उस औरत ने मुझे अपना पता दिया और मैं मिलने के लिए उस औरत के घर के
पास चला गयाऔर मैंने दरवाजे की घंटी बजा दी फिर अंदर से लगभग 30 साल की एक
खूबसूरत औरत नेदरवाजा खोला उस समय उस औरत ने एक फूलों के प्रिंट वाली हरे
से रंग की साड़ी औरब्लाउज पहना हुआ था और उसने बहुत सुंदर मेकअप भी किया
हुआ था और उसने अपने कानोंमें बहुत बड़े-बड़े झुमके पहने हुए थे वह देखने
में बहुत ही खूबसूरत और हंसमुख लगरही थी फिर जब उस औरत ने मुझे देखा तो वो
पूछने लगी कि तुम कौन हो तो मैंने कहा किमैं वही हूं जिससे आपकी कल बात हुई
थी आपको घर के लिए एक काम करने वाले की जरूरतथी ना तभी उस औरत ने मुझसे
कहा कि हां मुझे याद आया आओ अंदर बैठकर बात करते हैंफिर मैं अंदर गया और उस
औरत ने मुझे सोफे पर बिठा दिया वहीं पास में ही एक छोटा साबच्चा भी लेटा
हुआ था शायद वह बच्चा भी एक साल का ही था और वहां दूसरी तरफ लगभग 50साल की
एक औरत बैठी हुई टीवी देख रही थी फिर जिसने दरवाजा खोला था उस औरत नेमुझे
अपना नाम सुमन बताया और फिर मुझसे पूछा कि तुम्हारा नाम क्या है तो
मैंनेकहा कि मेरा नाम निखिल है फिर सुमन ने मुझसे पूछा कि हां तो निखिल अब
बताओ किकहां है वह काम करने वाली जिसके बारे में तुम बात कर रहे थे और वह
यहां कब तक आसकती है सुमन की यह बात सुनकर मैं सोच में पड़ गया कि शायद
सुमन को कुछ गलत कमी होगई है तभी मैंने सुमन से कहा कि मेरे पास कोई
नौकरानी नहीं है बल्कि मैं खुद ही कामकरने के लिए यहां आया हूं मेरी यह बात
सुनकर सुमन ने मुझसे कहा कि हम अपने घरमें किसी लड़के को नौकरी पर नहीं रख
सकते और वैसे भी जो काम एक नौकरानी कर सकती हैवह किसी लड़के के बस की बात
नहीं है तभी मैंने सुमन से कहा कि मैडम मुझे घर केसारे काम करने आते हैं
और
मैं खाना भी बहुत अच्छा बना लेता हूं मैं हर तरह से आपको खुश करने की
कोशिश करूंगा बस मुझेनौकरी पर रख लीजिए क्योंकि मुझे काम की बहुत जरूरत है
मेरी यह बात सुनकर सुमन नेमुझसे कहा कि मैं चाकर भी तुम्हें नौकरी पर नहीं
रख सकती क्योंकि मेरे पति ज्यादातर शहर से बाहर ही रहते हैं
और
घरमें सिर्फ मैं और मेरा छोटा सा बच्चा और मेरी सासू मां रहती है और इसलिए
मेरे पतिने साफ मना कर रखा है कि मैं किसी भी लड़के को यह आदमी को नौकरी पर
ना रखूं औरइसलिए मुझे सिर्फ एक नौकरानी की ही जरूरत है सुमन की यह बात
सुनकर मैंने उसके पैरपकड़ लिए और उससे कहा कि प्लीज मैडम मेरे ऊपर थोड़ी सी
मेहरबानी कर दीजिए मैं बहुतपरेशानी में हूं आप जो भी कहोगी मैं वो सब कुछ
करूंगा प्लीज मुझे काम पर रख लीजिएमेरी यह बात सुनकर सुमन ने कुछ देर सोचा
और फिर मुझसे कहने लगी कि क्या तुम सच मेंवो सब करोगे जो मैं कहूंगी तो
मैंने कहा कि हां जो भी आप कहोगी मैं वो सब कामकरूंगा तो सुमन ने कहा कि
ठीक है तुम आज से ही यहां पर नौकरानी वाला काम कर सकतेहो लेकिन ध्यान रखना
जो मैं कहूंगी वही करना पड़ेगा सुमन की यह बात सुनकर मैं खुशहो गया और
मैंने सुमन से कहा कि हां मैं आपकी हर बात मानूंगा तभी सुमन ने कहा किठीक
है वहां उस तरफ मेरी पुरानी नौकरानी का कमरा है वहां उसका कुछ पुराना सामान
भीरखा हुआ है जो जरूरत पड़ने पर तुम्हारे काम आएगा और अभी तुम कुछ आराम कर
लो औरफिर शाम को हमारे लिए खाना बनाना सुमन की यह बात सुनकर मैं उस
नौकरानी वाले कमरे में गया और मैंने अपना बैग भी वहीं पर रखदिया मेरे बैग
में ज्यादा कुछ नहीं था सिर्फ दो जोड़ी कपड़े और कुछ छोटी मोटीचीजें जैसे
कि रुमाल या कोई चिप्स का पैकेट और पानी की बोतल क्योंकि मैंने सोचाथा कि
जब मुझे काम मिल जाएगा तो मैं अपने लिए दूसरे नए कपड़े खरीद लूंगा और
बाकीजरूरत की चीजें भी खरीद लूंगा फिर मैंने उस कमरे में देखा तो वहांपर
सिर्फ एक चारपाई पड़ी थी और एक कपड़ों की अलमारी थी जिसमें शायद उस नौकरानी
केपुराने कपड़े रखे हुए थे लेकिन मुझे उस नौकरानी के पुराने कपड़ों का
क्या करना थाइसलिए मैं चुपचाप उस चारपाई पर एक कपड़ा बिछाकर उस पर लेट गया
और आराम करनेलगा और मुझे नींद आ गई फिर काफी देर बाद किसी की आवाज से मेरी
आंख खुली वो आवाजसुमन मैडम की थी फिर मैं जल्दी से उठा और अपने कमरे से
निकलकर सुमन मैडम के पासपहुंच गया मुझे देखकर सुमन मैडम ने कहा कि निखिल अब
तुम जल्दी से नहाकर आओ फिर मैंतुम्हें बताती हूं कि क्या करना है और हां
नहाने से पहले अपने शरीर पर यह क्रीम लगालेना क्योंकि तुम्हारे हाथों और
पैरों पर बहुत ज्यादा बाल दिख रहे हैं
जो कि काफी गंदे लग रहे हैं
और
मुझे गंदगी बिल्कुल भीपसंद नहीं है सुमन मैडम की यह बात सुनकर मैंने कहा
ठीक है मैडम और फिर उसके बादमैंने वह क्रीम ले ली और फिर मैं बाथरूम में
गया और उस क्रीम को अपने पूरे शरीर परअच्छी तरह से लगा लिया और फिर कुछ देर
के बाद मैं नहाने लगा नहाते समय मैंने देखाकि मेरे शरीर के सारे बाल साफ
हो चुके थे और मेरा शरीर एकदम चिकना और मुलायम हो चुका था फिर उसके बाद मैं
टोब लपेटकरबाथरूम से बाहर आया और अपने कपड़े पहनने के लिए कमरे में जाने
लगा और कमरे मेंपहुंचकर मैंने देखा कि मेरे कपड़े वहां नहीं थे तभी सुमन
मैडम मेरे पास आई औरमुझसे कहने लगी कि आज से तुम लड़कों वाले कपड़े नहीं
पहन सकते तुम्हे सिर्फ साड़ीब्लाउज और सलवार सूट ही पहनना होगा क्योंकि अब
से तुम इस घर की नौकरानी हो औरउस अलमारी में पहले वाली नौकरानी के कुछ
कपड़े रखे हैं
जो तुम्हें काम करते हुए पहनने हैं
सुमन की
यह बात सुनकर मैं एकदमसे चौक गया और फिर मैंने सुमन से कहा कि मैडम मैं
साड़ी ब्लाउज कैसे पहन सकता हूंमैं तो एक लड़का हूं ना तो सुमन ने कहा कि
अगर तुम लड़के हो तो क्या साड़ी ब्लाउजपहनने से तुम लड़की बन जाओगे और वैसे
भी साड़ी ब्लाउज सिर्फ लड़कियों के लिए और औरतों के लिए थोड़ी ना होता है
तभी मैंनेसुमन से कहा कि मैडम मैं ऐसे लड़कियों के क कपड़े पहनकर काम नहीं
कर सकता तभी सुमनने मुझसे कहा कि तुम तो कह रहे थे कि तुम मेरी हर बात
मानोगे और जो मैं कहूंगी वहसब करोगे लेकिन अब तुम मना कर रहे हो तो मैंने
सुमन से कहा कि मैडम मैंने यह थोड़ाही ना सोचा था कि आप मुझे साड़ी ब्लाउज
पहनने के लिए कहोगी तभी सुमन ने मुझसे कहाकि देखो निखिल तुम्हें तो पता ही
है कि हम औरतों के बीच में रहकर अगर कोई जवान लड़काकाम करेगा तो हमारे
पड़ोसी हमारे बारे में कैसी कैसी बातें करेंगे और फिर वह मेरेपति से एक-एक
की चारचार बनाकर लगा देंगे और फिर हमारे घर में झगड़े शुरू होजाएंगे और मैं
तो तुम्हारी मदद ही करना चाह रही थी लेकिन तुम हमारे घर में लड़ाईझगड़ा
करवा दोगे सुमन की यह बात सुनकर मैं सोच में पड़ गया फिर मैंने कुछ देर
सोचकरसुमन से कहा कि ठीक है मैडम अगर आप कहती हैं
तो मैं आपकी बात
जरूर मानूंगा क्योंकिजब आप मेरी मजबूरी समझकर मुझे नौकरी पर रख सकती है तो
मैं आपके लिए साड़ी पहनने कोभी तैयार हूं मेरी यह बात सुनकर सुमन खुश हो गई
और फिर वो अपनी सासू मां से बोली जोकि सुमन के छोटे बच्चे को अपनी गोद में
बैठाकर खिला रही थी देखो सासू मां मैंनेआपसे कहा था ना कि निखिल बहुत
अच्छा लड़का है वह मेरी बात जरूर मान जाएगा तो सुमन कीसासू मां ने कहा कि
हां बहू यह लड़का काफी भोला और अच्छा है नहीं तो आजकल के जमानेमें ऐसे
अच्छे और सीधे-साधे इंसान कहां देखने को मिलते हैंउन दोनों औरतों के मुंह
से अपनी तारीफ सुनकर मैं बहुत खुश हुआ फिर सुमन ने मुझसे कहा कि चलो अब
जल्दी से उस पहले वालीनौकरानी के कपड़ों में से बरा पैंटी निकाल कर पहन लो
और फिर मैं तुम्हें साड़ी पहननासिखा दूंगी सुमन की यह बात सुनकर मैंने अपने
कमरे में बनी कपड़ों की अलमारी खोली औरफिर मैंने देखा कि उसमें काफी सारी
साड़ियां थी और उनके साथ में मैचिंग ब्लाउज और पैटी कोट भी रखे हुए थे
लेकिनबरा पैंटी सिर्फ दो ही जोड़ी रखी हुई थी फिर मैंने लाल रंग की बिरा और
पेंटी निकालली मैंने अपनी जिंदगी में पहली बार बिरा और पेंटी को छुआ था
इसलिए मुझे पता नहींथा कि बिरा और पेंटी का कपड़ा इतना मुलायम और मखमली
होता है फिर मैंने वो बिरा औरपैंटी पहन ली मैंने बिरा पहली बार ही पहनी थी
इसलिए मुझे काफी देर लग गई थी फिर उसकेबाद मैंने सुमन मैडम को आवाज देकर
बुलाया और उनसे कहा कि मुझे साड़ी ब्लाउस पहनादीजिए फिर सुमन मेरे पास आई
और मुझे देखकर खुश हो गई और फिर सुमन मैडम ने मुझे ब्लाउजपहनाया जिसके होक
पीछे की तरफ लगे हुए थे और फिर मुझे पेटी कोट पहनाया और मुझेफूलों के
प्रिंट वाली एक काले से रंग की साड़ी पहना दी और साथ में मुझे हर स्टेपपर
बता भी रही थी कि साड़ी को कैसे पहनते हैं
फिर उसके बाद जब मैंने
खुद को शीशेमें देखा तो मैं बहुत अजीब लग रहा था क्योंकि मैंने साड़ी
ब्लाउज तो पहना हुआ था लेकिन मेरे चेहरे पर काफी बाल थे जिसकीवजह से मैं
बहुत गंदा सा नजर आ रहा था और यह देखकर मैं थोड़ा उदास सा हो गया तभीसुमन
ने मुझसे कहा कि निखिल क्या हुआ इतने उदास क्यों हो गए तो मैंने सुमन मैडम
सेकहा कि मैडम मैं साड़ी ब्लाउज में बहुत ही गंदा सा लग रहा हूं तभी सुमन
ने मुस्कुराते हुए मुझसे कहा कि चलो मेरेकमरे में मैं तुम्हें सुंदर बनाती
हूं और फिर वह मुझे अपने साथ कमरे में ले गई औरमुझे एक कुर्सी पर बिठा दिया
और जब मैंने सुमन मैडम के कमरे में देखा तो वहां बहुतसारा मेकअप का सामान
रखा हुआ था जैसे कि कोई कॉस्मेटिक की दुकान हो व सब सामानदेखकर मैंने सुमन
से पूछा कि मैडम इतना सारा मेकअप का सामान आप अकेली इस्तेमालकरती हो क्या
तो सुमन ने हंसते हुए कहा कि नहीं मैं इतना सारा मेकअप का सामान
खुदइस्तेमाल नहीं करती बल्कि मैं यहां पर आसपास की कुछ लड़कियों का और
औरतों का भीमेकअप करती हूं तभी मैंने आश्चर्य के साथ पूछा कि क्या मतलब है
आपका तो सुमन ने कहाकि मैं एक ब्यूटी पार्लर चलाती हूं आज मैं नई नौकरानी
के इंतजार में थी इसलिए अपनेपार्लर पर नहीं गई थी और कभी-कभी इमरजेंसी में
कुछ पड़ोस की औरतें और लड़कियां यहांघर पर ही मुझसे मेकअप करवाने आ जाती
हैं
और इस वजह से मुझे ज्यादा टाइम नहीं मिलपाता है और इसलिए मैंने
तुम्हें काम पर रखा है जिससे तुम घर का सब काम कर दियाकरो और मेरे बच्चे
का भी ध्यान रखा करो और मेरी सासू मां की सेवा भी कर दिया करोसुमन की यह
बात सुनकर मैंने कहा ठीक है मैं सारा काम बहुत अच्छी तरह से करूंगातभी सुमन
ने मुझसे कहा कि निखिल तुम एक लड़की बनने वाले हो इसलिए अब से तुमलड़कियों
की तरह बात करना नहीं तो सबको तुम्हारे बारे में पता चल जाएगा और फिर मेरे
पति तक भी यह बात चली जाएगी कि मैंनेएक जवान लड़के को अपने घर में काम
करने के लिए रख रखा है और आज से तुम्हारा नामनिखिल नहीं बल्कि निकिता है
सुमन मैडम की यह बात सुनकर मैंने कहा कि ठीक है अब सेमैं लड़कियों की तरह
बात करने की कोशिश करूंगी मेरी यह बात सुनकर सुमन मैडम खुशहो गई और फिर
सुमन ने मेरे चेहरे पर सेविंग क्रीम लगाई और मेरे चेहरे से दाढ़ीऔर मूछ को
पूरी तरह से साफ कर दिया और फिर उसके बाद सुमन ने मेरी आइब्रो को
लड़कियोंकी आइब्रो की तरह बहुत पतला कर दिया और फिर मेरे चेहरे पर मेकअप
करनेलगी सबसे पहले सुमन मैडम ने मेरे चेहरे पर फाउंडेशन लगाया और फिर मेरी
आंखों मेंकाजल और आईलाइनर लगाया और फिर आंखों की पलकों के ऊपर थोड़ा सा
आईशैडो लगाया औरफिर मेरे होठों पर एक लिपस्टिक लगा दी फिर उसके बाद मेरे
हाथों में चूड़ियां पहनाईजो कि पुरानी वाली नौकरानी की ही थी अपने हाथों
में चूड़ियां देखकर मुझे अपने मर्दहोने पर बहुत शर्मा रही थी फिर उसके बाद
मेरे हाथों और पैरों के नाखूनों पर नेल पोलिश लगाई और मेरे पैरों में पयल
भी पहनादी फिर उसके बाद मेरे माथे पर एक छोटी सी गोल बिंदी लगाई और फिर
मेरे सिर पर पल्लूरख दिया मेरे सिर के बाल लड़कियों जैसे लंबे तो नहीं थे
लेकिन फिर भी लड़कों केमुकाबले काफी लंबे थे और शायद सुमन मैडम के पास उस
समय हेर बिक भी नहीं थी फिरउसके बाद सुमन मैडम ने मुझे बड़े से शीशे के
सामने खड़ा कर दिया और भी मुझसे कहनेलगी कि तुम अब शीशे में खुद को देखो कि
कैसी लग रही हो तब तक मैं तुम्हारे लिए एकखास चीज लेकर आती हूं और फिर
सुमन मैडम चली गई और मैं खुदको शीशे में देखने लगा मैं उस समय एक लड़की
जैसा ही लग रहा था और साड़ी ब्लाउजपहनकर मुझे काफी अजीब भी लग रहा था
क्योंकि मैंने पहली बार ही सड़ी ब्लाउजपहना था फिर मैं अपने हाथों की
चूड़ियों को छूकर देखने लगा मेरे हाथ उस समय बहुतही नाजुक और लड़कियों जैसे
लग रहे थे मैं खुद को निहार ही रहा था कि तभी सुमन मैडमआ गई और फिर व मुझे
फिर से कुर्सी पर बैठने के लिए कहने लगी सुमन मैडम की बात सुनकर मैं फिर
सेकुर्सी पर बैठ गया और फिर सुमन मैडम ने एक पेन उठाया और मेरी नाक पर एक
निशान बनानेलगी तभी मैंने सुमन मैडम से पूछा कि आप यह मेरी नाक के साथ क्या
कर रही हैं
तो सुमनमैडम ने कहा कि मैं तुम्हारी नाक में छेद करने
वाली हूं जिससे कि तुम नथनी पहन सकोऔर फिर मैं तुम्हारे कानों में भी छेद
करूंगी जिससे कि तुम झुमके भी पहन सको क्योंकि नाक और कान छिदवाने के बाद
हीतुम्हें एक असली लड़की होने का एहसास होगा और जब भी तुम अपने चेहरे को
देखोगी तोतुम्हें यह याद रहेगा कि तुम एक लड़की हो और तुम्हें लड़कियों की
तरह यहां पर रहनाहै और घर के काम करने हैं
तभी मैंने सुमन मैडम से
पूछा कि जब मैं वापस लड़का बनूंगातो मेरे नाक और कान के छेद का क्या होगा
तो सुमन ने कहा कि मैं एक ब्यूटी पार्लरचलाती हूं और मुझे सब पता है इसलिए
तुम ज्यादा फिक्र मत करो मैं सब ठीक करदूंगी सुमन मैडम की यह बात सुनकर मैं
चुप हो गया फिर उसके बाद मैडम ने मेरी नाक मेंसुई से छेद कर दिया मेरी नाक
में छेद होते ही मेरी तो सारी हवा ही निकल गई थी पतानहीं लड़कियों में
इतनी हिम्मत कैसे आती है फिर उसके बाद सुमन मैडम ने मेरी नाकमें एक नथनी
पहनाई और फिर मेरे कानों में भी छेद कर दिए और उनमें झुमके पहना दिएफिर
उसके बाद मैं बड़े से शीशे में खुद को देखने लगा और फिर मुझे एहसास हुआ कि
नाकऔर कान छिदवाने के बाद मेरा चेहरा पूरी तरह से ही बदल गया था और अब मैं
कहीं सेभी लड़कों जैसा नहीं दिख रहा था फिर सुमन मैडम ने मुझसे कहा कि देखो
निकिता वैसे तोकोई भी नौकरानी इस तरह से सच सवर कर घर के काम नहीं करती है
लेकिन तुम्हें हमेशा हीमेकअप और गहनों का इस्तेमाल करना पड़ेगा जिससे कि
तुम्हें हर समय लड़की जैसा महसूसहोता रहे और तुम यहां नौकरानी वाला काम
अच्छे से करती रहो और इससे घर में आनेवालों को भी यकीन होता रहेगा कि तुम
सच में एक लड़की हो जो यहां नौकरानी वाला काम कर रही होसुमन मैडम की यह बात
सुनकर मैंने कहा ठीक है मैडम फिर उसके बाद सुमन मैडम ने कहा किअब रसोई में
जाओ और कुछ खाने के लिए बना दो जरा हम भी देखें कि तुम कैसा खानाबनाती हो
सुमन मैडम की बात सुनकर मैं रसोई में जाने लगा तभी मेरा पैर साड़ी में
अटकगया और मैं बस गिनने ही वाला था लेकिन सुमन मैडम ने मुझे पकड़ लिया और
फिर मुझसेकहने लगी कि साड़ी पहनकर ऐसे नहीं चलते बल्कि साड़ी को पहले पैर
से आगे की ओरधकेल और फिर अपना पैरा आगे की तरफ जमीन पर रखते हैं
नहीं
तो तुम साड़ी में फंसकर गिरतीरहोगी सुमन मैडम की यह बात सुनकर मैंने कहा
ठीक है और फिर मैं सुमन मैडम के बताएहुए तरीके से ही साड़ी को पैरों से
धकेल हुए आगे कदम बढ़ाने लगा और फिर साड़ी मेरेपैरों में नहीं फंसी और मैं
आसानी से रसोई तक चला गया जब मैं चल रहा था तो सुमन मैडमऔर आंटी जी मतलब कि
सुमन मैडम की सासू मां मुझे साड़ी पहन का चलते हुए देख रही थी औरमुस्कुरा
रही थी फिर आंटी ने सुमन मैडम से कहा कि बहू देखो जरा निकिता का चलना
कैसेचल रही है एकदम मर्दों की तरह तभी सुमन मैडम ने आंटी से कहा कि मां जी
अभी तो यहलड़के से लड़की बनी है धीरे-धीरे सीख जाएगी कि साड़ी पहनकर
लड़कियों की तरह कैसे चलना है और लड़कियों की तरह कैसेव्यवहार करना है फिर
उसके बाद मैं खाना बनाने लगा वैसे तो मैंने पहले भी कई बारखाना बनाया था
लेकिन साड़ी पहनकर और चेहरे पर मेकअप करके और हाथों में चूड़ियांपहनकर मैं
पहली बार खाना बना रहा था और यह सब सच में बहुत ही अजीब था लेकिन मुझे
कामकी बहुत जरूरत थी और मुझे कोई काम भी नहीं मिल रहा था इसलिए मैंने
नौकरानी वाला कामकरना ही अपने लिए सही समझा था फिर मैंने कुछ ही देर में
खाना बना लिया और सुमनमैडम को और आंटी जी को खाना परोस कर दे दिया फिर वो
दोनों खाना खाने लगी और मैंसुमन मैडम के बच्चे को अपनी गोद में लेकर खिलाने
लगा फिर जब उन दोनों ने खाना खाया तो उनकोवो बहुत पसंद आया और फिर सुमन
मैडम ने कहा कि निकिता तुम तो बहुत अच्छा खाना बनातीहो अब तुम हमेशा यहीं
पर काम करना और हमें अच्छा-अच्छा खाना बनाकर खिलाना और इतनाकहकर सुमन मैडम
खुशी के मारे मेरी तारीफ करते हुए हंसने लगी और साथ में आंटी जी भीहंसने
लगी फिर उन दोनों ने खाना खा लिया और फिर आंटी जी ने मुझसे कहा कि
निकिताबेटी अब तू इस बच्चे को मुझे दे दे और तू भी खाना खा ले और फिर बर्तन
को अच्छी तरहसे धोकर रख देना फिर मैंने बच्चे को आंटी जी के हाथों में दे
दिया और मैं भी खानाखाने लगा खाना खाते समय मैं सोच रहा था कि इन दोनों सास
बहू का व्यवहार कितना अच्छाहै जो मुझ जैसे एक मामूली नौकर को इतने प्यार
से खाना खाने के लिए कह रहे हैं
औरमुझे अपने घर का एक सदस्य समझ रहे हैं
और
यही सोचते हुए मैंने अपना खाना खा लिया औरफिर मैं सारे गंदे बर्तन उठाकर
रसोई में ले गया और फिर मैं उन सब गंदे बर्तनों कोधोने लगा बर्तनों को साफ
करते हुए मेरी चूड़ियां बार-बार बर्तनों से टकरा रही थीऔर बहुत तेज शोर मचा
रही थी जिससे मुझे एहसास हो रहा था कि मैं एक लड़की हूं औरइस घर की एक
नौकरानी हूं फिर सारे बर्तन साफ करने के बाद मैंने उन बर्तनों को अच्छे से
जमा कर रख दिया और फिर मैं रसोईसे बाहर आ गया और फिर अपने कमरे में चला गया
फिर कुछ देर के बाद आंटी जी ने मुझेबुलाया और मुझसे कहा कि बेटी निकिता
जरा थोड़ी सी चाय बना दे फिर मैं रसोई में चलागया और चाय बनाकर आंटी जी को
और सुमन मैडम को दे दी और मैं वहीं पर एक साइड में खड़ाहो गया तभी आंटी जी
ने मुझसे कहा कि बेटी निकिता तू भी चाय पी लेना तो मैंने आंटीजी से कहा कि
मैं बाद में पी लूंगी आपके साथ चाय पीने में मुझे अच्छा नहीं लगेगा क्योंकि
मैं यहां नौकरानी हूं ना तभी सुमनमैडम ने मुझसे कहा कि तुम यह कैसी बात कर
रही हो अगर नौकरानी हो तो क्या इंसान नहींहो चलो जाओ अपने लिए भी चाय लेकर
आओ और हमारे साथ ही चाय पियो सुमन मैडम की यहबात सुनकर मैं रसोई में गया
और फिर मैंने अपने लिए भी एक कप में चाय कर ली और फिरमैं भी उनके साथ में
बैठकर ही चाय पीने लगा फिर चाय पीने के बाद मैंने सारे कप कोधोकर रख दिया
और फिर सुमन मैडम ने कहा कि निकिता जरा मेरे बच्चे के लिए भी दूध गर्मकर दो
तभी मैंने सुमन मैडम से पूछा कि आप अपने बच्चे को बोतल का दूध पिलाते हो
क्यातो सुमन मैडम ने कहा कि हां कभी-कभी बोतल का दूध भी भी पिलाना पड़ता है
फिर उसकेबाद मैंने थोड़ा सा दूध गर्म करके एक बोतल में भर दिया और फिर मैं
खुद ही अपने हाथोंसे सुमन मैडम के बच्चे को उस बोतल का दूध पिलाने लगा फिर
कुछ देर के बाद बच्चा दूधपीकर सो गया और फिर सुमन मैडम और आंटी जी भी सोने
के लिए चली गई और फिर मैं भी अपनेकमरे में सोने के लिए चला गया फिर मैं
अपनी चारपाई पर लेट गया और सोने की कोशिशकरने लगा लेकिन मुझे नींद नहीं आ
रही थी क्योंकि मैंने साड़ी ब्लाउज पहना हुआ थाऔर ब्लाउज के अंदर बरा भी
पहनी हुई थी जिसकी वजह से मुझे सोने में काफी दिक्कतहो रही थी लेकिन फिर भी
मैं मजबूरी में ऐसे ही लेटा रहा और फिर काफी देर के बादमुझे भी नींद आ गई
फिर अगले दिन मैं सुबह को जल्दी उठ गया और सारे घर में झाड़ूलगाई और फिर
उसके बाद मैंने पोंछा लगाया और फिर हाथ मुंह धोकर चाय बनाने लगा फिरचाय
बनाने के बाद मैंने सुमन मैडम को जगाया और उन्हें गुड मॉर्निंग बोला और
उन्हें चाय का कप दे दियायह देखकर सुमन मैडम बहुत खुश हुई और फिर मैंने
आंटी जी को भी गुड मॉर्निंग बोला और उनको भी चाय का कप दे दिया और फिर मैं
भीरसोई में गया और अपने लिए भी मैंने चाय ले ली और फिर मैं भी चाय पीने लगा
फिर उसकेबाद मैंने कप को धो दिया और फिर मैं हाथ मुंह धोकर खाना बनाने लगा
मैंने चने कीदाल और चावल और साथ में रोटी भी बनाई थी फिर सुमन मैडम नहा
धोकर व साड़ी ब्लाउजपहनकर तैयार हुई और खाना खाने बैठ गई और खाना खाते हुए
मुझसे कहने लगी कि निकिताशाम को मैं पार्लर से वापस आते समय कुछ ताजी सब्जी
ले आऊंगी और तुम यहां पर मेरेबच्चे का और मांजी का ख्याल रखना और हां ना
का दूसरी साड़ी पहन लेना और मांजीतुम्हारी मदद कर देंगी सुमन मैडम की यह
बात सुनकर मैंने कहा ठीक है फिर उसके बादसुमन मैडम ने खाना खाया और फिर वह
अपनी स्कूटी लेकर अपने ब्यूटी पार्लर पर चली गईफिर मैंने आंटी जी को भी
खाना दिया और फिर ब के लिए भी दूध गर्म करके दिया और फिरबाद में मैंने भी
खाना खाया और फिर खाना खाने के बाद मैंने सारे गंदे बर्तन साफकिए और फिर
मैंने गंदे कपड़े धोने शुरू कर दिए उन गंदे कपड़ों में आंटी जी की
बिरापेंटी और सुमन मैडम की बिरा पेंटी भी थी जिसको देखकर मुझे बड़ा अजीब लग
रहा थाक्योंकि मैं तो सोच रहा था कि कम से कम वो दोनों अपनी ब्रा पेंटी को
तो धोएंगे ही लेकिन उन्होंने बरा पैंटी को ऐसे ही छोड़दिया था लेकिन मैं
तो एक नौकरानी था इसलिए मुझे वो धोने ही थे इसलिए मैंने बिनाज्यादा सोचे उन
सभी गंदे कपड़ों को धो दिया और फिर मैंने उनको छत पर सुखाने केलिए डाल
दिया छत पर कपड़े फैलाते हुए मुझे एक पड़ोस वाली औरत ने देख लिया था
लेकिनवह मुझसे कुछ नहीं बोली थी क्योंकि शायद वह सोच रही होगी कि मैं कोई
नई नौकरानीहूं फिर उसके बाद मैं नीचे आ गया फिर उसके बाद ऐसे ही समय बीत
गया और शाम हो गई शामको सुमन मैडम अपने ब्यूटी पार्लर से वापस आ गई गई थी
और वह कुछ सब्जी भी पकाने केलिए लेकर आई थी फिर शाम को मैंने खाना बनाया और
फिर सबने मिलकर खाना खाया और फिरखाना खाने के बाद सुमन मैडम ने मुझसे कहा
कि निकिता अब मौसम काफी ठंडा होने लगा हैइसलिए तुम मेरे यह कुछ गर्म कपड़े
अपने कमरे में रख लो और जब भी तुम्हें ठंड लगेतो इन्हें पहन लेना क्योंकि
यह कपड़े अब मैं पहनती नहीं हूं सुमन मैडम की यह बातसुनकर मैंने उनके व
पुराने कपड़े ले लिए और अपने कमरे में ख लिए और फिर हम सब सोगए फिर इसी तरह
से कुछ दिन और बीत गए और मैं सुमन मैडम के घर में नौकरानी बनकररहने लगा और
मैंने साड़ी पहनना भी अच्छी तरह से सीख लिया था और मैं अपना मेकअप भीखुद
ही करने लगा था फिर एक दिन सुमन मैडम ने मुझसे कहा कि निकिता आज मेरी
बहनराधिका यहां आ रही है और अगले हफ्ते दीपावली का त्यौहार है और वो
दीपावली केत्यौहार तक यही रहेगी और तुम उसका खास ध्यान रखना सुमन मैडम की
यह बात सुनकरमैंने कहा कि ठीक है मैं ध्यान रखूंगी फिर जब दोपहर का समय था
तो मैंरसोई में खाना बना रहा था उस समय मैंने सुमन मैडम की दी हुई एक
पुरानी साड़ी पहनीहुई थी मेरा पूरा ध्यान खाना बनाने में था तभी मुझे किसी
ने अपनी बांहों में भर लियाऔर मैं एकदम से डर गया फिर जब मैंने पीछे मुड़कर
देखा तो मेरे सामने एक बहुत हीखूबसूरत लड़की खड़ी थी जिसने गुलाबी रंग की
पटियाला सलवार और कुर्ती पहनी हुई थीऔर उसने बहुत प्यारा मेकअप कर रखा था
और तभी मुझे सुमन मैडम की बात याद आ गई औरमैं समझ गया कि मेरे सामने खड़ी
हुई लड़की कोई और नहीं बल्कि राधिका ही है और जबराधिका ने मेरा चेहरा देखा
तो वो एकदम से चौक गई थी क्योंकि वह मुझे अपनी बहन समझरही थी और फिर वह
मुझे सॉरी बोलने लगी फिर उसके बाद मैंने राधिका को सोफे पर बिठायाऔर उसे
चाय बनाकर दी फिर राधिका ने मुझसे पूछा कि तुम यहां कब से काम कर रही हो
तोमैंने कहा कि मुझे बस कुछ ही दिन हुए हैं
यहां पर काम करते हुए
फिर राधिका ने कहाकि ठीक है मैं भी नहाने जा रही हूं और इतना कहकर व बाथरूम
में चली गई फिर राधिकाने नहा धोकर एक प्लाजो सलवार और एक कुर्ती पहन ली और
फिर अपने बालों में कंघी करनेलगी और फिर मैं बाथरूम में गया और फिर मैं
राधिका के गंदे कपड़े धोने लगा राधिका केकपड़े पसीने से भीगे हुए थे और
उनमें से काफी बदबू आ रही थी फिर उसके बाद मैंनेराधिका के गंदे कपड़ों को
धो दिया और साथ में ब्रा और पेंटी को भी धो दिया और फिर राधिका के धुले हुए
कपड़ों को लेकर छत परफैलाने के लिए जाने लगा मुझे देखकर राधिका ने मुझसे
कहा कि ब्रा पंटी को तो मैं खुदही धो देती तो मैंने राधिका से कहा कि कोई
बात नहीं राधिका मैडम आप इस घर की मालकिनकी बहन है और आपकी सेवा करना मेरा
फर्ज है मेरी यह बात सुनकर राधिका ने कहा कि तुममुझे राधिका मैडम नहीं
बल्कि सिर्फ राधिका कहो क्योंकि हम लगभग एक ही उम्र के हैं
औरमुझे
अच्छा नहीं लगता कि कोई मुझे मैडम या मालकिन कहे राधिका की यह बात सुनकर
मैंने कहा ठीकहै अब से मैं आपको राधिका कहकर बुलाऊंगा के कपड़ों को छत पर
सुखाने केलिए चला गया और फिर कपड़े छत पर फैलाने के बाद मैं नीचे आ गया फिर
मैंने खाना तैयारकिया और राधिका और आंटी जी को खाना परोस कर दिया और फिर
मैंने भी खाना खाया औरसुमन मैडम के बच्चे को भी दूध गर्म करके दिया फिर
उसके बाद मैंने सारे गंदे बर्तन साफ किए और फिर मैं अपने कमरे में
जाकरथोड़ी देर आराम करने लगा तभी मेरे कमरे में राधिका आ गई और मुझसे मेरे
बारे मेंबातें करने लगी फिर मैंने राधिका को अपने बारे में सब कुछ बता दिया
बस एक बात कोछोड़कर कि मैं एक लड़की नहीं बल्कि लड़का हूं फिर उस दिन से
राधिका मुझसे काफीबातें करने लगी और मुझे अपनी सहेली समझने लगी और मैं भी
राधिका को अपनी सहेली समझनेलगा था और सच कहूं तो मुझे राधिका से प्यार भी
हो गया था लेकिन मैं राधिका सेअपने दिल की बात नहीं कह सकता था क्योंकि
सुमन मैडम को मुझ पर बहुत भरोसा था और मैंसुमन मैडम का दिल नहीं दुखाना
चाहता था फिर ऐसे ही चार दिन और बीत गए और फिर अगलेदिन जब मैं साड़ी ब्लाउज
पहने हुए फर्श पर पोंछा लगा रहा था तो तभी राधिका मेरे पाससे होकर गुजरने
लगी तभी अचानक से चिकने फर्श पर राधिका का पैर फिसल गया और राधिकाफर्श पर
गिर गई यह देखकर मैंने एकदम से से राधिका को खड़ा किया लेकिन उससे ठीक
सेचला नहीं जा रहा था शायद उसके पैर में थोड़ी सी मोच आ गई थी फिर मैंने
राधिका कोगोद में उठाया और उसे कमरे में लेकर गया और उसे बेड पर लिटा दिया
और फिर उसके पैरपर सरसों का तेल लगाकर अच्छी तरह से मालिश करने लगा राधिका
के पैर बहुत ही खूबसूरतलग रहे थे और पैरों के नाखूनों पर गुलाबी रंग की नेल
पलिस राधिका के पैरों की खूबसूरती में चार चांद लगा रही थी फिर जबमैंने
राधिका से पूछा कि अब दर्द कैसा है तो राधिका कुछ बोल नहीं रही थी वो बस
मुझेदेखे जा रही थी कि मैं किस तरह उसकी सेवा कर रहा हूं तभी मैंने राधिका
से फिर सेपूछा कि क्या हुआ राधिका कहां खो गई तुम तो राधिका ने एकदम से कहा
कि तुम्हारे प्यार में राधिका के मुंह से यह बात सुनतेही मैं एकदम से चौक
गया मुझे अपने कानों पर विश्वास नहीं हो रहा था इसलिए मैंनेफिर से राधिका
से पूछा कि क्या कहा तुमने तो राधिका ने कहा कि हां मैं सच मैं तुमसेप्यार
करने लगी हूं क्या तुम मुझसे शादी करोगी राधिका की अमू से यह बात सुनकर
मैंबहुत हैरान था वैसे मैं भी राधिका से बहुत प्यार करने लगा था लेकिन मैं
उसको बतानहीं सकता था फिर मैंने राधिका से कहा कि हम दोनों शादी कैसे कर
सकते हैं
मैं भी तोतुम्हारी तरह एक लड़की हूं और इस घर की नौकरानी
भी हूं तभी राधिका ने मुझसे कहाकि मुझे पता है कि तुम लड़की नहीं बल्कि
लड़का हो तभी मैंने राधिका से हैरानी केसाथ पूछा कि तुम्हें कैसे पता चला
कि मैं लड़की नहीं बल्कि लड़का हूं जबकि मैं तो हर बातका एकदम सही से ध्यान
रखती हूं तो राधिका ने कहा कि पहले मेरे सवाल का जवाब दो फिरमैं बताऊंगी
तो मैंने राधिका से कहा कि हां मुझे भी तुम बहुत अच्छी लगती हो लेकिनमैं
तुम्हारी सुमन दीदी से पूछे बिना हां नहीं कर सकती क्योंकि उनको मुझ पर
भरोसाहै और मैं उनका भरोसा नहीं तोड़ सकती तभी राधिका ने मुझसे कहा कि मेरी
बहनने ही मुझे तुम्हारे बारे में सब कुछ बताया था और मैं यहां पर तुम्हें
देखने औरतुमसे मिलने के लिए ही आई थी राधिका की यह बात सुनकर मैंने हैरानी
के साथ उससे कहाकि मैं तुम्हारी बात को समझी नहीं जरा ठीक से समझाओ तो
राधिका ने कहा कि बाकी बातेंतुम दीदी से ही पूछना वही तुम्हें सब कुछ
बताएंगे और फिर मैंने भी राधिका से कहा किठीक है मैं सुमन मैडम से ही पूछ
लूंगी फिर उसके बाद मैं राधिका के पास से उठकर आ गयाऔर फिर घर के बाकी
कामों में लग गया उस समय आंटी बाहर गार्डन में बैठी थी औरबच्चे को खिला रही
थी फिर जब सुमन मैडम घर पर आई तो मैंने उनसे पूछा कि आपने राधिकाको मेरे
बारे में क्यों बताया तो सुमन मैडम ने कहा यह सब तो मैंने तुम्हारे हीकहने
से किया था तभी मैंने सुमन मैडम से पूछा कि मैंने कब कहा था तो सुमन मैडम
नेकहा कि निकिता तुम्हें याद है जब एक दिन शाम को मैंने तुमसे पूछा था कि
अगरतुम्हें कोई लड़की सा शादी के बाद भी साड़ी ब्लाउज पहनाए तो तुम क्या
करोगी तो तुमने कहा था कि तुम उसकी सहेली बन जाओगीऔर खुशी-खुशी उसकी सेवा
करोगी सुमन मैडम की यह बात सुनकर मैंने उनसे कहा कि हांमैंने ऐसा कहा था
तभी सुमन मैडम ने मुझसे कहा तो फिर राधिका ही वो लड़की है जोतुम्हें लड़की
के रूप में पसंद करती है क्योंकि कॉलेज के टाइम से ही राधिका को एकलड़की से
प्यार था क्योंकि राधिका लेस्बियन है लेकिन उस लड़की ने राधिका को धोखा
देकर किसी लड़के से शादी कर ली थी औरतभी से राधिका ने सोच लिया था कि वह
कभी शादी नहीं करेगी क्योंकि लड़के उसे पसंदनहीं थे और कोई भी लड़की राधिका
से शादी नहीं कर सकती थी क्योंकि लेस्बियनलड़कियों के दिल की फीलिंग को
कोई नहीं समझ सकता लेकिन जब मैंने लड़की के रूप मेंतुम्हारी फोटो राधिका को
दिखाई थी और तुम्हारे बारे में बताया था तोब वो बहुतहैरान हुई थी और वो
तुमसे मिलकर देखना चाहती थी कि तुम कितने अच्छे हो और दूसरेलड़कों से कितने
अलग हो और तुम लड़कियों की और औरतों की कितनी इज्जत करते हो औरइसलिए
राधिका यहां तुमसे मिलने ही आई थी और तुम्हारी अच्छाई ने राधिका को भी
प्रभावित कर दिया है और राधिका ने मुझेकुछ देर पहले ही फोन पर बता दिया था
कि वह तुमसे शादी करना चाहती है और तुम भी हांकर चुकी हो और अब इस तरह से
तुम्हें एक सुंदर और पढ़ी लिखी लड़की मिल जाएगी औरराधिका को तुम्हारे रूप
में अपनी लेस्बियन सहेली मिल जाएगी सुमन मैडम की यह बात सुसुनकर मैं बहुत
खुश था फिर उसके कुछ दिन के बाद ही राधिका ने और मैंने शादी कर लीऔर फिर
शादी के बाद से मैं राधिका के घर में एक औरत बनकर रहने लगा और अब सच कहूंतो
औरत बनकर रहते हुए मुझे यह एहसास हो चुका है कि औरत होना बहुत ही
खुशकिस्मतीकी बात है और अब मैं और राधिका सहेलियों की तरह मिलकर रहते हैं
और अब हम बहुत खुश हैं ब
मेरा नाम दीपक है और मुझे बचपन से ही लड़कियों के कपड़े पहनने का बहुत शौक था और मैं छुप-छुपकर अपनी बड़ी बहन के कपड़े पहनता था लेकिन मुझे कभी भी खुलकर लड़कियों के कपड़े पहनने का मौका नहीं मिलता था और फिर जब मैं थोड़ा बड़ा हुआ तो मैंने छुप छुपकर अपनी मां की साड़ी और ब्लाउज भी पहनना शुरू कर दिया था मैं हमेशा ही लड़की बनकर जीने के सपने देखा करता था और मैं बार-बार यही सोचता था कि एक दिन मैं जरूर लड़की बन जाऊंगा लेकिन मुझे यह भी पता था कि मेरा यह सपना कभी पूरा नहीं होगा मैंने कई बार अपने मम्मी पापा को अपने बारे में बताने का सोचा लेकिन मेरी कभी हिम्मत ही नहीं हुई लेकिन फिर भी मैंने चोरी छिपे लड़कियों के कपड़े पहनना जारी रखा और शायद मैं थोड़ा सा किस्मत वाला भी था कि मैं कभी लड़कियों के कपड़े पहनते हुए रंगे हाथों नहीं पकड़ा गया था फिर ऐसे ही धीरे-धीरे समय बीतने लगा और मैंने कोलीज जाना शुरू कर दिया फिर मैंने अपने अंदर की लड़की को दबाने के लिए खुद को ज्यादा से ज्यादा पढ़ाई और खेल जैसी गतिविधियों में अभ्यस्त कर लिया जिससे कि किसी को मेरे बारे में कुछ पता ना चल जाए कॉलेज की लड़कियों को देखकर मेरा मन ...

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