Skip to main content

बसंती मतवाली

 

मेरा नाम बसंत है, और मेरी उम्र 25 साल है। मैं कानपूर में रहता हूं। मैं शादीशुदा आदमी हूं, और मेरी पत्नी का नाम सुनीता है,और उसकी उम्र 23 साल है। मैं ज्यादा पढ़ा लिखा नही था,बस किसी तरह से बीएससी पास था ,पर मैं टाइपिंग जनता था , इसलिए मैं एक प्राइवेट सेक्टर में छोटी सी जॉब करता था। मैं और सुनीता एक ही बिरादरी के थे, इसलिए सुनीता के पापा ने सुनीता कीशादी मेरे साथ करा दी थी।सुनीता मेरे से काफी ज्यादा पढ़ी लिखी थी, लेकिन वो कोई जॉब नहीं करती थी,या यु कहो की मैंने कभी उसे जॉब की परमिशन नहीं दी थी। लेकिन शादी के एक साल बाद सुनीता की किस्मत ने उसका साथ दिया, और सुनीता की बड़ी कम्पनी मैं नोकरी लग गई। सुनीता को अपनी सासु मां की हर बात पर टोकने को आदत पसंद नही थी, इसलिए उसने नोकरी लगने के कुछ महीने बाद ही अपने पैसों से एक नया घर खरीद लिया था। सुनीता की सैलरी मेरी सैलरी से बहुत ज्यादा थी। लेकिन सुनीता ज्यादातर अपनी सैलरी पार्टियों में, और मौज मस्ती में खर्च कर देती थी। और मेरे मना करने पर वो मुझसे लड़ने लगती थी, और कहती कि जब मैं खुद से पैसे कमाती हूं, तभी खर्च करती हूं, मैं तुमसे तो कोई पैसा नही मांगती। ये पैसे मेरे हैं,और मैं जैसे चाहूं इन्हे खर्च करूंगी। फिर थक हार कर मुझे ही चुपहोना पड़ता था। अब हमारे झगड़े बढ़ने लगे थे, वो तो शायद मुझसेझगड़ने का मौका ढूंढती रहती थी, और इसी कारण मैं डिप्रेशन में रहने लगा, इससे मेरे काम पर भी बुरा असर पड़ने लगा, आखिरकार एक दिन मुझे नौकरी से निकाल दिया गया।

 Part 1

 Part 2 

 Part 3 

 Part 4 

 Part 5

Comments

Popular posts from this blog

लड़के को जबरदस्ती बनाया नौकरानी || Ladke ko jabardasti banaya naukrani

मेरा नाम निखिल है और आज मैं आपको बताऊंगा कि कैसे मुझे एक लड़के से एक नौकरानी बननापड़ा और फिर मेरे साथ कितना बुरा हुआ और कितना अच्छा हुआ सब कुछ बताऊंगा तो चलिएकहानी शुरू करते हैं यह बात उस समय की है जब मेरी बारवी की पढ़ाई पूरी हो चुकी थीलेकिन मुझे कोई अच्छी सी नौकरी नहीं मिल रही थी क्योंकि मेरा घर एक छोटे से गांवमें था फिर मैंने सोचा कि मैं शहर में कोई अच्छी सी नौकरी करूंगा और यही सोचकर मैंअपने घर वालों से कुछ पैसे लेकर शहर में पहुंच गया और अपने लिए कोई अच्छी सी नौकरीतलाशने लगा लेकिन शहर में बर्बी तक पढ़ाई करने वालों को भला कौन पूछता है क्योंकि शहरमें तो लोग बहुत बड़ी-बड़ी डिग्री लेकर घूमते हैं इसलिए जब मुझे कोई अच्छी सी नौकरी नहीं मिली तो मैंने इंटरनेट पर औरअखबारों में भी नौकरी ढूंढनी शुरू कर दी थी फिर मुझे अखबार में एक नौकरी की पोस्टदिखी जिसमें घर का काम करने वाली और खाना बनाने वाली की जरूरत थी वैसे तो यह जॉबमहिलाओं के लिए थी लेकिन मैंने सोचा कि मुझे भी यह नौकरी मिल सकती है क्योंकिमेरे घर में कोई बहन नहीं थी इसलिए मैं घर में खाना बनाना और औरतों वाले काम करनासीख गया था फ...

समझदार पत्नी | लड़के को जबरदस्ती बनाया लड़की || Samzdar Patni | ladke ko banaya ladki

मेरा नाम दीपक है और मुझे बचपन से ही लड़कियों के कपड़े पहनने का बहुत शौक था और मैं छुप-छुपकर अपनी बड़ी बहन के कपड़े पहनता था लेकिन मुझे कभी भी खुलकर लड़कियों के कपड़े पहनने का मौका नहीं मिलता था और फिर जब मैं थोड़ा बड़ा हुआ तो मैंने छुप छुपकर अपनी मां की साड़ी और ब्लाउज भी पहनना शुरू कर दिया था मैं हमेशा ही लड़की बनकर जीने के सपने देखा करता था और मैं बार-बार यही सोचता था कि एक दिन मैं जरूर लड़की बन जाऊंगा लेकिन मुझे यह भी पता था कि मेरा यह सपना कभी पूरा नहीं होगा मैंने कई बार अपने मम्मी पापा को अपने बारे में बताने का सोचा लेकिन मेरी कभी हिम्मत ही नहीं हुई लेकिन फिर भी मैंने चोरी छिपे लड़कियों के कपड़े पहनना जारी रखा और शायद मैं थोड़ा सा किस्मत वाला भी था कि मैं कभी लड़कियों के कपड़े पहनते हुए रंगे हाथों नहीं पकड़ा गया था फिर ऐसे ही धीरे-धीरे समय बीतने लगा और मैंने कोलीज जाना शुरू कर दिया फिर मैंने अपने अंदर की लड़की को दबाने के लिए खुद को ज्यादा से ज्यादा पढ़ाई और खेल जैसी गतिविधियों में अभ्यस्त कर लिया जिससे कि किसी को मेरे बारे में कुछ पता ना चल जाए कॉलेज की लड़कियों को देखकर मेरा मन ...

खतरनाक पत्नी | मर्द को जबरदस्ती बनाया घरेलू औरत || khataranaak Patni | mard ko jabaradastee banaaya ghareloo aurat

मेरा नाम अनन्या है लेकिन यह मेरा असली नाम नहीं है यह मेरी पत्नी अंजलि ने मुझे दिया है जबकि मेरा असली नाम कु सागर है और यह कहानी भी मैं अपनी पत्नी की आज्ञा लेकर ही लिख रहा हूं यह बात दो साल पहले की है उस समय मेरी शादी अंजलि के साथ हुई थी और उस समय मेरी उम्र 25 साल थी और अंजलि की उम्र 26 साल थी हां आपने सही सुना अंजलि मुझसे एक साल बड़ी थी अंजलि का और मेरा बॉडी साइज लगभग एक जैसा ही था लेकिन मैं एक मर्द था इसलिए मैं सोचता था कि मुझ में अंजलि से ज्यादा ताकत है और अंजली तो बहुत नाजुक सी है और मेरी इसी गलतफहमी की वजह से मेरे साथ कुछ ऐसा हुआ जिसकी मैं कल्पना भी नहीं कर सकता था एक बार की बात है अंजलि की कुछ सहेलियां हमारे घर पर उससे मिलने आई थी अंजली ने उनको चाय पिलाई और फिर वह सब बातें करने लगी और बातों ही बातों में अंजली और उसकी सहेलियां हाथ का पंजा लड़ाने वाला खेल खेलने लगी उनको यह खेल खेलते हुए देखकर मैंने हंसते हुए उनसे कहा कि यह सब मर्दों का खेल है औरतों का नहीं क्योंकि औरतें नाजुक होती हैं और ऐसा खेल खेलने से औरतों की कलाई मुड़ सकती है मेरी यह बात सुनकर वो सभी एकदम से चुप हो गई फिर अंजली...